Monday, October 17, 2016

करवाचौथ में पतिदेव की आरती

मैं तो आरती उतारूँ रे, बच्चों के पापा की।
जय हो हस्बैंड, तेरी जय जय हो...
जय हो हस्बैंड, तेरी जय जय हो...
* बड़ी पूँजी है बड़ा-बड़ा कैश इसके बटुए में।
जिंदगी के हैं सारे ऐश इसके बटुए में।।
क्यूँ न झाँकूँ मैं बारम्बार इसके बटुए में।
दिखे हर घड़ी मॉल और बाजार इसके बटुए में।।
नृत्य करूँ झूम-झूम, बटुए को चूम-चूम,
बेलन ना मारूँ, आज इसे बेलन ना मारूँ रे...
मैं तो आरती उतारूँ रे, बच्चों के पापा की।।
* सदा होती है जय-जयकार मेरे हस्बैंडवा की।
पर नारी पे टपके ना लार मेरे हस्बैंडवा की।।
हो सबसे निराली कार मेरे हजबैंडवा की।
कभी इज्जत न हो तार-तार मेरे हस्बैंडवा की।।
जो कमाए मुझे दे दें, जो भी दूँ हँसके ले ले
स्वामी पुकारूँ रे... कल 'टॉमी' पुकारूँ रे....
मैं तो आरती उतारूँ रे, बच्चों के पापा की।।
* हम हैं पत्तल तो तुम दोना, पति परमेश्वरजी।
हमसे कभी ना खफा होना, पति परमेश्वरजी।।
हम जो मारें तो मत रोना, पति परमेश्वरजी।
सबके कपडे सदा धोना, पति परमेश्वरजी।।
नौकर तुम, जोकर तुम, शोफर तुम, शौहर तुम
आठ आने वारूँ रे, तुम पे आठ आने वारूँ रे।।
मैं तो आरती उतारूँ रे हस्बैंड प्यारे की....
मैं तो आरती उतारूँ रे बच्चों के पापा की।
जय हो हस्बैंड तेरी जय जय हो

जय हो हस्बेंड तेरी जय जय हो....!!

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