इन्दोरी बुखार
भिया
आठ दिन से रोज बुखार आरिया था ,
रोज गोलिया खारिया था,पर इसकी बारां बजाउ,कोई फरक ई नि मालूम पड़ रिया था।
परेसान हो गिया भिया।
पल्लेई नि पड़ रि थि कि हो क्या रिया है।
फिर किस्मत की बात देखो भिया ।कल मल्हार गंज पे जाना हुआ।
चोराये पे बैठे बैठे मगज मे एक भेथरिंग एडिया आया।
किराना दूकान से जीरावन का पैकेट लिया नुक्कड़ के सेंव वाले से १०० ग्रा.बारीक सेंव ली
और घर पे ला के
सभी दवाइयो पे " जीरावन "लगा के बारीक सेंव अौर प्याज डाल के एक और डोज़ लिया।
सई बोल रिया हूँ भिया
आज सूबे सेइ टन टनाट घूम रिया हूँ।
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